1965 के युद्ध में पाक को धूल चटाने वाले एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह के बारे में 10 बातें

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एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह

अर्जन सिंह कहते थे-1965 का युद्ध जल्दी खत्म न होता तो पाकिस्तान को मिटा देते

देश के पहले एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह नहीं रहे. 98 साल की उम्र में दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च ऐंड रेफरल में 16 सितंबर को उन्होंने आखिरी सांस ली. इससे पहले उनकी बीमारी की खबर सुनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण उन्हें देखने के लिए अस्पताल पहुंचे थे. उनके बारे में जानिए-

पीएम मोदी ने अस्पताल जाकर अर्जन सिंह का हालचाल लिया.

Went to R&R Hospital to see Marshal of the Indian Air Force Arjan Singh, who is critically ill. I also met his family members.

— Narendra Modi (@narendramodi)

एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह के बारे फैक्ट

 

1. एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह का जन्म पंजाब के ल्यालपुर में 15 अप्रैल 1919 को हुआ था, जो अब पाकिस्तान के फैसलाबाद के नाम से जाना जाता है. वो महज 44 साल की उम्र में एयरफोर्स चीफ बने थे.

रिटायरमेंट के दिन तक एयरक्राफ्ट उड़ाना नहीं भूले थे अर्जन सिंह.

 

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2. 19 साल की उम्र में ही उन्होंने रॉयल एयरफोर्स कॉलेज ज्वॉइन कर लिया था. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अर्जन सिंह ने बर्मा में बतौर पायलट और कमांडर हिस्सा लिया था. अर्जन सिंह के प्रयासों की बदौलत ही ब्रिटिश भारतीय सेना ने इंफाल पर कब्जा किया था.

 

3. 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में अर्जन सिंह ने अद्भुत नेतृत्व क्षमता दिखाते हुए पाकिस्तान को धूल चटा दी थी. इसी अभूतपूर्व प्रदर्शन के लिए उन्हें एयर चीफ मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया था.

4. उन्होंने एयरफोर्स प्रमुख के तौर पर लगातार पांच साल अपनी सेवाएं दीं. ये किसी एयर चीफ के द्वारा किया गया सबसे लंबा कार्यकाल है. 1965 में उन्हें पद्म विभूषण देकर सम्मानित किया गया था. 1969 में वो रिटायर हो गए थे.

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5. 1971 में अर्जन सिंह को स्विट्जरलैंड में भारत का एंबेसडर नियुक्त किया गया. इसके अलावा उन्होंने वेटिकन और केन्या में भी देश के लिए अपनी सेवाएं दीं. 1989 में वो दिल्ली के गवर्नर भी बने. अर्जन सिंह एयरफोर्स के मार्शल रहे हैं. मार्शल कभी रिटायर नहीं होते.

6. एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह  का फ्लाइंग रिकॉर्ड भी बहुत तगड़ा रहा. उन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान 60 से भी ज्यादा तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाए. उनको फ्लाइंग का इतना शौक था कि वो अपनी नौकरी के आखिरी दिन तक प्लेन उड़ाना नहीं भूले.

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7. अप्रैल 2016 में अर्जन सिंह के 97वें जन्मदिन के मौके पर पश्चिम बंगाल स्थित पनागढ़ एयरफोर्स बेस का नाम उनके नाम पर रखा गया. इसे अब एमआईएफ अर्जन सिंह के नाम से जाना जाता है. ऐसा पहली बार हुआ था जब एक जीवित ऑफिसर के नाम पर सैन्य प्रतिष्ठान का नाम रखा गया था बराक ओबामा भारत आए तो अर्जन सिंह से मिले थे.

8.भारत की तीनों सेनाओं में 5 स्टार रैंक हासिल करने का गौरव अब तक तीन अफसरों को मिला है. इसमें एयर मार्शल अर्जन सिंह के साथ फील्ड मार्शल मानिक शॉ और केएम करियप्पा शामिल हैं. 5 स्टार रैंक पाने वाले ये अधिकारी कभी सेना से रिटायर नहीं होते हैं. अर्जन सिंह को 2002 में ये सम्मान मिला था.

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9. अर्जन सिंह के एयर चीफ रहते हुए एयरफोर्स का काफी कायाकल्प हुआ था. एयरफोर्स को नए जमाने के सुपरसोनिक फाइटर प्लेन, टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, असॉल्ट हेलिकॉप्टर के साथ कई आधुनिक हथियार मिले थे. हैदराबाद में एयरफोर्स एकैडमी शुरू हुई थी. मॉडर्न रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क पर भी काम शुरू हुआ था. अब्दुल कलाम का निधन हुआ तो व्हीलचेयर पर आए अर्जन ने उन्हें खड़े होकर सैल्यूट किया था.

10. 27 जुलाई, 2015 को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लाया गया.तब कलाम के अंतिम दर्शन के लिए राष्ट्रपति और पीएम समेत कई नेता पहुंचे थे. लेकिन सबकी नजरें कांपते हाथों से सैल्यूट करते योद्धा अर्जन सिंह पर थीं. वे आए तो व्हीलचेयर पर थे, लेकिन कलाम पार्थिव शरीर को देखते ही खुद चलकर पास आए और तनकर सलामी भी दी.

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Gurmeet Sandhu

मेरा नाम गुरमीत सिंह है मैं gajabfact.com का फाउंडर हु मेरी ये वेबसाइट हेल्थ ओर फैक्ट पर आधारित है जिसका उद्देश्य लोगो को महत्वपूर्ण जानकारी हिंदी प्रदान करना है।जो उनके काम मे आ सके ।

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