कैसे 7वी फेल लड़का बना 50 करोड़ की कंपनी का मालिक

7वी फेल लड़का बना 50 करोड़ की कंपनी का मालिक

कहते है की जब किसी के मन में सिर्फ आगे बढ़ने की इच्छा और उमंग हो तो उसे कोई चीज़ नहीं रोक सकती। इस बात को सही साबित करते हुए आज हम आपके लिए लाए है एक ऐसे शख्स की सक्सेस स्टोरी जो कभी 4000 रूपए महीना कमाता था लेकिन उसकी इच्छा और उमंग ने उसे 50 करोड़ की कंपनी का मालिक बना दिया। हम बात कर रहे है “विमल पटेल ” की तो पढ़िए उनकी स्टोरी।
जब पिताजी ने ही निकाला घर के बाहर


गुजरात के आणंद से ताल्लुक रखने वाले विमल पटेल का बचपन से ही पढाई में बिल्कुल भी मन नहीं था और शायद यही वजह थी की वे 7वी फ़ैल हो गए थे। एक दिन विमल का पड़ोसी से झगड़ा हो गया। उनके पिताजी उनसे इतने खफा हुए कि उन्होंने विमल को घर से निकाल दिया।
सीखा हीरा तराशने का काम

विमल के पिता हीरे तराशने का काम किया करते थे और परिवार की अच्छी हालत न होने के कारण पढाई छोड़ उन्होंने भी अपने पिताजी से हिरे तराशने का काम सीखा ।
मात्र 4000 रूपए महीने में भरा अपना पेट

घर से बाहर निकाल दिए जाने के बाद वक़्त की मार से सीख लेते हुए विमल ने अपना हौसला नहीं खोया और मुंबई का रुख किया। विमल ने मुंबई में अपनी नई ज़िन्दगी की शुरुआत हिरे तराशते हुए एक मजदूर के रूप में की । उस समय

उन्हें दिन भर मजदूरी के लिए महीने के सिर्फ चार हज़ार रूपये पगार मिलती थी और उसी से उनका दाना-पानी चलता।

शुरू किया जेमस्टोन की ब्रोकिंग का काम

विमल ने मजदूर के रूप में दो साल काम किया उनकी तनख्वाह 75 फीसदी तक बढ़ भी गई, लेकिन वे जानते थे कि वे अगर ऐसे ही चलते रहे तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। विमल के कुछ मित्र रफ डायमंड व जेमस्टोन की दलाली का काम

करते थे और बदले में कमीशन पाते थे। सन 1997 में विमल ने भी अपने दोस्तों के साथ काम करना शुरू किया और बिजनेस की बारीकियों को सीखा।


अपनी कंपनी की आधारशिला रखी

सन 1998 में विमल ने गुजराती होने का प्रमाण देते हुए खुद का धंधा शुरू कर लिया। उन्हें श्रीलंका और थाईलैंड के कारोबारी और लोकल ट्रेडर्स और ज्वेलर्स के बीच दलाली करनी होती थी। उन्हें इस काम के लिए हर दिन 1 हजार

से 2 हजार रु. कमिशन मिलने लगा। उन्होंने मुंबई के आस-पास के इलाके में अपनी पैठ जमाई और सन 1999 में 50 हज़ार रूपये की सेविंग्स से “विमल जेम्स” नामक कंपनी की आधारशिला रखी।

एक बार फिर पटेल शून्य पर आकर खड़े हुए

शुरुआत में उन्होंने अपने ही कुछ भाईयों की मदद से कंपनी को चलाना शुरू किया और एक साल के बाद उनकी कंपनी ने 8 लोगों की सहायता से 15 लाख रूपए का टर्नओवर कर लीया। लेकिन सन 2001 विमल के लिए बेहद दुखद रहा। उनके यहाँ काम करने वाला एक कर्मचारी ट्रेडर के 29 लाख रूपए के हीरे और जैमस्टोन लेकर फरार हो गया। विमल को अपनी सारी इनवेस्टमेंट खर्च कर उस ट्रेडर के नुकसान की भरपाई करनी पड़ी। और वे एक बार फिर वे शून्य पर आकर खड़े हो गये। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी सुर एक बार फिर शून्य से शुरुआत किया। साल-दर-साल मेहनत करते हुए उन्होंने एक बार फिर सफलता के पायदान पर चढ़ने शुरू कर दिए।

सन 2008 की मंदी में फिर लगा झटका 

विमल अपनी पिछली परेशानियों से उभरे ही थे की सन 2008 की मंदी ने उन्हें दूसरा झटका दिया। लेकिन इस बार विमल पीछे हटने वाले नहीं थे उन्होंने मंदी का सामना करने के लिए रिटेल की दुनिया में कदम रखा और

उन्होंने जलगांव में अपनी पहली ज्वैलरी स्टोर खोली और साथ ही एक एस्ट्रोलॉजर भी हायर किया। उनका आइडिया यह था कि स्ट्रोलॉजर की मदद से ग्राहक अपने लिए सही रत्न चुनें और पहनें। आइडिया इतना कारगर साबित हुआ

कि पहले ही दिन लाखों रूपये की बिक्री हुई और जिसके बाद फिर विमल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
आज अकेले महाराष्ट्र में है उनके 52 स्टोर्स

ज़िन्दगी में कई बार धक्के खाने के बाद खड़े हुए विमल पटेल की सुवर्णस्पर्श जेम्स एंड ज्वेलरी के आज महाराष्ट्र में 52 स्टोर हो चुके हैं और उनकी कंपनी प्राइवेट इक्विटी के जरिए 40 करोड़ रु. जुटाने वाली है। इतना ही नहीं विमल ने वाशी में जेम्स और ज्वलरी के लिए फैक्टरी भी शुरू की है। वे जल्द ही पूरे देश में कामकाज का विस्तार भी करने वाले है।
एक साधारण हिरा तराशने वाले मजदूर से लेकर कारोबारी बनने वाले विमल पटेल का यह सफर आपको कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में हमें ज़रूर बताए और इस प्रेरणादायक कहानी को अपने मित्रो के साथ भी साझा करे।

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